क्या मस्त मोदी जी ने बाटली में उतारा पूरे देश को

क्या मस्त मोदी जी ने बाटली में उतारा पूरे देश को…. मैं मोदी जी का अंधभक्त तो नहीं परंतु मैं उनका कायल जरूर हूं | मुझे मोदी जी की कुछ बातें बहुत पसंद है जैसे  की उनका विश्वास और कोई भी बात उसी विश्वास से कहां जैसे अगले ही पल वो सच होने वाला हो |

चलिए शुरुआत करते हैं उस समय से, जब पूरा देश मोदी जी को बिलकुल भी नहीं  जानता था और मोदी जी सिर्फ एक RSS कार्यकर्ता के तौर पर गुजरात के मानिनी नगर तक सीमित थे | उसके बाद आप को शायद पता भी नहीं होगा कि मोदी जी उन चुनिंदा नेताओं में से हैं जो पहली बार विधायक बनते हीं मुख्यमंत्री भी बने थे ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि भाजपा की रीढ़ माने जाने वाली संस्था RSS में इनका गहरा पैठ जमा हुआ था | ये पहली बार 2001 में विधायक बने और साथ ही साथ मुख्यमंत्री भी, तो यह सिर्फ गुजरात में ही सीमित थे उस समय तक | परंतु इन्हें तो कुछ बड़ा करना था तो उसी समय आपको याद होगा कि देश का सबसे बड़ा दंगा हिंदू मुस्लिम के बीच गुजरात में हुआ था | मैं पूरे दावे के साथ तो नहीं कह सकता है कि इसके पीछे मोदी जी का हाथ था परंतु मैं इसे पूरी तरह झुठला भी नहीं सकता क्योंकि आप कहीं भी देख ले या किसी भी सभा में मुद्दा उठा ले अगर आप 2002 के दंगों के बारे में बात करेंगे तो मोदी जी का नाम उठकर जरूर आएगा | जो भी हो उस दंगे में मोदी जी का हाथ हो या ना हो परंतु इन्हें एक हिंदू नेता के रूप में पहचान वहीं से मिली थी और इन्हें पूरा देश उसी समय से जाने लगा था |

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यही वह समय था जब से पूरे देश का हिंदू इन्हें एक चर्चित नेता के रूप में देखने लगा था और अपना समझने लगा था, फिर इन पर कई मुकदमे चलें इस दंगे को लेकर, हालांकि बाद में इन्हें कोर्ट ने इस मुकदमे से बरी कर दिया | अब बात करते हैं मोदी जी का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के बारे में, अटल जी के जाने के के बाद या उनके उम्रदराज होने के बाद भाजपा के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं था क्योंकि आडवाणी जी भी काफी उम्रदराज हो चले थे, हालांकि हमारा देश हिंदू प्रधान देश है यहां की कुल आबादी में से लगभग 70 प्रतिशत हिंदू है तो भाजपा ने एक ऐसा चेहरा खोजना शुरू किया जो जो चर्चित हो, जाना पहचाना हो और एक हिंदू नेता के रुप में जाना जाता हो, तो ऐसा चेहरा नरेंद्र मोदी का ही मिला | जिन्हें हम इस लेख में बाटलीवाला भी कह रहे हैं |

लोकसभा चुनाव के लगभग 2 वर्ष पहले वे भाजपा का प्रमुख चेहरा बन चुके थे और भावी प्रधानमंत्री भाजपा की तरफ से इन्हें ही देखा जाने लगा था  | इन्होने अपना रैलियां भी शुरू कर दी और  रैलियों के बीच इनका भाषण इतना प्रेरणादाई और लुभावना रहता था कि लोग इनकी तरफ खिंचे जाने लगे | इनके व्याख्यान का सबसे मुख्य बात यह रहता था कि इनके किए वादे बड़े लंबे चौड़े रहा करते थे यूं ही मतलब इनके तरफ से वादे कुछ भी किए जाने लगे | हालांकि इनका चेहरा गुजरात में एक विकास पुरुष का चेहरा था और यह बात सारे देश को पता थी, तो इनके बातों पर लोगों को भरोसा होना भी शुरू हो चुका था | आपने तो इनका भाषण जरूर सुना होगा क्योंकि देश का ऐसा कोई कोना ही नहीं बचा था जहां पर मोदी जी ने अपना भाषण ना दिया हो |

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मोदी जी के वादों में सबसे पहला वादा जो था वह 1500000 वाला वादा था इस बारे में मोदी जी ने कहा था कि हम देश के बाहर से कितना काला धन वापस लाएंगे की देश के प्रत्येक जनता के बैंक खाते में 1500000 रुपए जमा किए जाएंगे इस वादे के साथ साथ बहुत सारे ऐसे वादे जैसे चलिए आपको हम कुछ मोदी जी के वादे जो उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दिए थे नंबरिंग में बताते हैं और विस्तार में भी |

  1. पहला वादा तो 1500000 वाला था जो शायद अब तक आपके बैंक खाते में भी पहुंच गया होगा
  2. देश के अधिकतम बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराया जाएगा
  3. महंगाई पहले से घटेगी
  4. पेट्रोल का दाम कम होगा
  5. पांच “प” – परंपरा प्रतिभा पर्यटन पण और प्रौद्योगिकी – मुझे नहीं लगता की इन पांचों में से किसी पर भी ढंग से काम हुआ है |
  6. सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ से पूरी तरह सख्ती से निपटा जाएगा
  7. आतंकवाद चरमपंथ और अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे
  8. टेक्स्ट ढांचे का सरलीकरण करना और उसको न्याय संगत बनाना क्या आपको लगता है कि जीएसटी आने के बाद सब कुछ नया संगत हुआ है भाई मुझे तो इतना ही दिख रहा है कि कोई भी सामान हो या कोई भी सर्विस हो मुझे तो ज्यादा पैसे वह करने पर रहे हैं
  9. किसानों को उनकी लागत पर कम से कम 50% लाभ मिलना सुनिश्चित करना सबसे ज्यादा हंसी मुझे इसी वादे पर आ रही है कि जिस किसान को 50% लाभ मिलना सुनिश्चित किया गया था वही किसान आज सबसे ज्यादा आत्महत्या कर रहा है यह तो तय है कि अगर भाजपा की सरकार बनी है तो इसमें मुख्यता वोट किसानों के ही हैं और आज उन्हें ही कृषि रिंग के नीचे दबकर आत्महत्या करना पड़ रहा है
  10. प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी मिलेगा यह भी वादा उन्हीं वादों के समान खोखला साबित हुआ है लोग किसानों के खेतों तक समुचित पानी नहीं पहुंच पा रहा है जिससे सूखे की नौबत आ रही है और ढंग का फसल ना हो पाने से किसान कर्ज के बोझ तले दब कर आत्महत्या करने को विवश हो रहे हैं|

 

यह सब वादे करके मोदी जी ने 2014 में अपनी सरकार तो बना ली परंतु उनके वादों में से कुछ छोटे-मोटे वादों को छोड़कर बाकी कोई भी वादा सरकार के 3 वर्ष पूरा होने तक भी पूर्ण नहीं हो पाया है | इसीलिए मैं कह रहा था क्या मस्त मोदी जी ने पूरे देश को बाटली में उतारा है यह तो वही बात हुई ना एक व्यापारी आता है बोलता है कि आप मेरा सामान खरीदो उसके बाद आपको कोई दिक्कत नहीं आएगी यह सामान आपके सारे समस्याओं को दूर कर देगा लेकिन जैसे ही वह व्यापारी सामान बेच कर जाता है उसका सामान ही लोगों के हाथों से गायब हो जाता है तो अब आप समझ गए होंगे कि इस लेख का शीर्षक ऐसा क्यों रखा गया है कि “मोदी जी ने क्या मस्त पूरे देश को बाटली में उतारा है”

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इन वादों के कहानियों में, मैं क्लाइमेक्स तो भूल ही गया वह था कि मोदी जी की सरकार बनने के बाद राम मंदिर तो जरूर बनाया जाएगा राम मंदिर बनाना तो दूर मोदी जी इसके बारे में एक बार चर्चा करते हुए भी नजर नहीं आए आज तक | मतलब चुनाव से पहले मोदी जी एक पतंग उड़ा रहे थे जिसका धागा अनंत था और उस पतंग को मोदी जी ने इतना ढील दिया कि उसको फिर वापस समेटने में मोदी जी को दिन में ही तारे नजर आ रहे हैं या फिर यूं कहें कि उस ढील दिए हुए धागे को समेटने का विचार ही मोदी जी का नहीं था | बात यहीं तक खत्म नहीं होती अभी पुराने वादों के लिस्ट में 1% भी पूर्ण नहीं हुआ है परंतु मोदी जी का वर्तमान भाषणों में भी नए नए वादों की झड़ी लगी रहती है | मोदी जी हर नए वादे करने के तुरंत बाद उसे भूलने के लिए एक विदेशी दौरा जरूर करते हैं जय हो नरेंद्र भाई मोदी जी की |

नोट – यह लेख अंध भक्तों के लिए नहीं है, कृपया अंधभक्त इस लेख से दूर रहे वरना लेखक कि इसमें कोई जिम्मेवारी नहीं होगी

 

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