निलिगिरी माउंटेन रेलवे दुनिया  के गिने चुने रेलवेज में से है जो स्टीम से चलते हैं | निलिगिरी रेल
रोज यात्रियों को दक्षिण भारत के पहाड़ों में ले जाती है और वापस लाती है | यह सिलसिला 1908 से चला आ रहा है |

अपने यात्रा के दौरान पड़ने वाले खूबसूरत वादियों और पहाड़ो के कारण इस ट्रेन को निलगिरी क्वीन भी कहा जाता है | इस खूबसूरत यात्रा का लुत्फ़ लेने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं और यहाँ की खूबसूरत यादें समेट  कर ले जाते हैं |

इस यात्रा के दौरान आपको चारों तरफ हरे ऊँचेभड़े ऊँचे बादलों से घिड़े पहाड़ , तरह तरह के जंगली जानवर मिलेंगे जिनकी तस्वीर आप कैमरे में तो उतरेंगे ही, साथ ही साथ आपके दिल में  भी उतर जाएगी |

अब आपको एक दिलचस्प बात बताते हैं | आपने शाहरुख़ खान का चल छैया छैयां गाना तो सुना ही होगा | इस गाने की शूटिंग इसी ट्रेन की छत पर की गयी थी |

निलगिरी माउंटेन रेलवे की यात्रा मेट्टुपालयम से शुरू होती है और उटकमंडलम पर जा के ख़त्म होती है | इस 46 किलोमीटर की यात्रा के दौरान 250 ब्रिज और 16 टनल पड़ते हैं | चूँकि जाने समय ट्रेन को पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है , इसे जाने में लगभग 5 घंटे लगते हैं और वापस
आने में साढ़े  3 घंटे |

भारतीय रेल इस रूट को अपग्रेड करने पर विचार कर रहा था ,लेकिन वह के लोगों ने आन्दोलन चला कर इस एतिहासिक ट्रेन  को इसी रूप में रहने देने की मांग की | इसके बाद साल 2005 इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा भी मिल गया जिसके बाद भारतीय रेल ने इसे अपग्रेड करने का प्लान छोड़ दिया |

जीवन में एक बार निलगिरी क्वीन की यात्रा जरुर करें , यकीन मानिये. आप इस यात्रा को भूल नहीं पाएंगे |

देखें विडियो :

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